Rajasthan GK || Indian Polity and Economy || पंचवर्षीय योजना

संरचनात्मक ढाँचा –

  • पदेन अधयक्ष – प्रधानमंत्री उपाध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति प्रधानमंत्री करता है, शपथ भी प्रधानमंत्री दिलाता है।
  • उपाध्यक्ष – अरविन्द पनगडिया (राजस्थान के भीलवाड़ा से सम्बन्धित) उपाध्यक्ष बनने से पहले राजस्थान में मुख्यमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष थे।
  • उपाध्यक्ष को केबिनेट मंत्री के समान दर्जा दिया गया है।
  • पदेन सदस्य – 1. विवेक देबोरॉय (अर्थशास्त्री) – पदमश्री सम्मानित 2. V.K. सारस्वत (DRDO के पूर्व प्रमुख)।
  • पूर्णकालिक सदस्यों को राज्यमंत्री के समान दर्जा दिया गया है। पदेन सदस्य – 4 केबिनेट मंत्री
  1. गृहमंत्रीराजनाथ सिंह 2. वित्त मंत्री – अरूण जेटली 3. कृषि मंत्री-राधामोहनसिंह (बिहार के) 4. रेल मंत्री – सुरेश प्रभु
  • विशेष आमत्रित सदस्य – 3 मंत्री
  1. प्रकाश जावडेकर – मानव संसाधन मंत्री।
  2. नितिन गडकरी – सड़क एवं परिवहन मंत्री
  3. थावरचन्द गहलोत – सामाजिक न्यास एवं अधिकारिता मंत्री।
  • सचिव – CEO अमिताभ कांत वरिष्ठ IAS को सचिव बनाया  जाता है।
  • शासकीय परिषद – सभी राज्यों के मुख्यमंत्री तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रमुख इसमें सदस्य होते है।
  • नीति आयोग में राष्ट्रीय विकास परिषद की भूमिका शासकीय परिषद के रूप में होती है या होगी।
  • वर्तमान में नीति आयोग केन्द्र के साथ-साथ राज्यों के लिए भी नियोजन का कार्य करेगा।
  • नीति आयोग की एक साल में 2 बैठक होना अनिवार्य होगी।
  • क्षेत्रीय परिषद – दो या दो से अधिक राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों के बीच विवादित मुद्दों के निपटान के लिए तथा तालमेल बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय परिषद भूमिका निभायेगी सम्बन्धित राज्यों (जिनके बीच विवाद है) के मुख्यमंत्री या केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रमुख इसमें सदस्य होगे जबकि इसकी अध्यक्षता नीति आयोग का उपाध्यक्ष करेगा।
  • नीति आयोग में बाहर से (सदस्यों के अलावा) विशिष्ट विशेषज्ञों को सलाह के लिए बुलाया जा सकता है।

नीति आयोग के कार्य-

  • केन्द्र के साथ-साथ राज्यों के नियोजन का कार्य करना।
  • केन्द्र व राज्यों के बीच तालमेल बढाना (सहकारी संघवाद)।
  • विकेन्द्रीकरण (सत्ता का हस्तान्तरण) – निम्न से उच्च।
  • क्षेत्रीय परिषद के माध्यम से राज्यों के बीच तनाव को खत्म करना।
  • शासकीय परिषद के माध्यम से राज्यों की भूमिका को बढ़ावा।
  • सामूहिक प्रयासो से योजनाओ का क्रियान्वयन (Think Tank)
  • समावेशी विकास के लिए कार्य।
  • एक पैनल के रूप कार्य।
  • सलाहकारी निकाय के रूप में विशिष्ट विशेषज्ञों की सलाह से।
  • लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए आर्थिक व सामाजिक विकास की योजनाओं पर बल।
  • योजनाओ के माध्यम से लोगों को मुख्य धारा में लाना/जोड़ना।
  • बजट बनाने में सहायता करता है।
  • आर्थिक नियोजन से तात्पर्य – भौतिक और मानवीय संसाधनो के आवंटन के लिए पूर्वानुमान लगाना ताकि भारत के सभी लोगो को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य पूरा किया जा सके।
  • 1938 में कांग्रेस के हरिपुरा अधिवेशन में राष्ट्रीय नियोजन समिति का गठन किया गया लेकिन IInd World war के कारण इसकी सिफारिशे लागू नहीं की जा सकी।
  • 1992 तक पहली 7 पंचवर्षीय योजनाएं बनाई गई। जिसमें नियोजन का प्रारूप निम्न था 1. राष्ट्रीय/केन्द्रीकृत/परम्परागत नियोजन 8वीं पंचवर्षीय योजना आयोग की भूमिका में परिवर्तन किया गया तथा क्षेत्रीय/विकेन्द्रीकृत/साकेतिक नियोजन पर बल दिया।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page