भारत में गरीबी और बेरोजगारी को दूर करने के उपाय
- शिक्षा का बल-भारत में साक्षरता दर को साक्षरता का आधार माना जाता है। जबकि निरक्षर न होने अर्थात् केवल साक्षर होने से शिक्षा को बढ़ावा नहीं मिलता शिक्षा का वास्तविक अर्थ एक बालक के द्वारा औसतन कितना समय स्कूल में बिताया गया। HDR रिपोर्ट 2014 के अनुसार भारत का औसत स्कूल वर्ष 4.4 है जो कि बहुत कम है। जबकि नार्वे जैसे स्केंडेवियन देशों का स्कूल वर्ष 15 वर्ष के करीब है इसीलिए मानव विकास सूचकांक में इनका उच्च स्थान रहता है। (अन्य कारण जीवन प्रत्याशा अधिक, प्रति व्यक्ति आय भी अधिक है)।
- स्वास्थ्य सुविधायों पर बल –भारत में लगभग 42% बच्चे कुपोषण से पीड़ित है। शिशु मृत्यु दर (IMR) (1000 बच्चों के जन्म पर मृत बच्चों की संख्या), मातृत्व मृत्यु दर (MMR) (प्रति 1 लाख बच्चों के जन्म पर मृत माताओं की संख्या), TFR कुल प्रजनन दर (भारत में औसतन 1 माता द्वारा बच्चों को दिया गया जन्म) आंकड़े चिंताजनक है। इसीलिए भारत में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर नहीं है। सरकार द्वारा केन्द्र तथा राजस्थान में स्वास्थ्य सम्बन्धी कई योजनाएं लागू की गई है जैसे – मिशन इन्द्रधनुष (सात बीमारियों में बच्चों के टीकाकरण के लिए), राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2015, जननी सुरक्षा योजना (माँ, जननी शिशु सुरक्षा योजना – नया नाम), राजस्थान में निः शुल्क दवा योजना तथा जाँच योजना इत्यादि।
- जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण –भारत जैसे देश में जहाँ जनसंख्या बहुत अधिक है। सभी लोगों को संसाधनों का समान बंटवारा करना मुश्किल है। UNO की रिपोर्ट के अनुसार भारत नें जनसंख्या में चीन को पीछे छोड़ देगा। इस तरह जनसंख्या का बढ़ना तथा तुलना रूप से संसाधनों का कम होना, जनसंख्या विस्फोट कहलाता है। भारत में सन् 2000 राष्ट्रीय जनसंख्या नीति बनाई गई। इसके तीन तरह के उद्देश्य है-
- दीर्घकालीन उद्देश्य –सन् 2077 तक जनसंख्या को स्थिर करना।
- मध्यकालीन उद्देश्य –TFR को नियन्त्रित करना। इसे 12वीं योजना में TFR 2-1 लाने का लक्ष्य रखा गया। हालांकि वर्तमान शहरी TFR = 1.8 हो चुका जो कि एक उपलब्धि है लेकिन ग्रामीण TFR का अधिक होना चिंताजनक है।
- अल्पकालीन उद्देश्य –परिवार नियोजन तथा गर्भ निरोधकों का इस्तेमाल करना सन् 2000 में भारत सरकार ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग का गठन किया जिसका उद्देश्य जनसंख्या सम्बन्धी को क्रियान्वित नीतियों करना तथा जनसंख्या नियन्त्रित करने के उपाय करना।
- भारत में बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ग) जो कि 919 है जब कि राजस्थान में है जो कि राष्ट्रीय औसत से काफी कम है तथा हरियाणा जैसे राज्यों 867 है। जनगणना 2011 का यह सबसे चिंता जनक आकड़ा है। इसीलिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में बाल लिंगानुपात 950 करने का लक्ष्य रखा गया। (राष्ट्रीय स्तर पर)।
- इन्ही कारणों से हरियाणा के पानीपत से 22 जनवरी 2015 से बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं योजना लागू की। राजस्थान में इस योजना की ब्रेंड एम्बेसडर (दीपा कुमारी) को बनाया गया।
